Sad Shayari - Dil ka darwaza khulla hai raja




खेल जो भी खेलो दिमाग से खेलना जीत जाओगे,
दिल को बीच मे लाए तो हार जाओगे.

बुरी आदतें अगर वक़्त पे ना बदलीं जायें,
तो वो आदतें आपका वक़्त बदल देती हैं..

चलो थोड़ा सुकून से जिया जाए,
जो दिल दुखाते हैं
उनसे थोड़ा दूर रहा जाए

वाक़िफ़ कहाँ दुश्मन
अब हमारी उड़ान से,
वो कोई और थे
जो हार गए तूफान से

सिर्फ उमर ही छोटी है,
जजबा तो दुनिया को
मुठ्ठी में करने का रखते है

फर्क नहीं पड़ता मुझे कि
दुनिया क्या कहती है,
मैं अच्छा हूँ बहुत
ये मेरी माँ कहती है

अपनी परेशानियों की वजह दूसरों को मानने से
आपकी परेशानियां कभी कम नहीं हो सकती हैं

नोट इकट्ठे करने की बजाए
दोस्त इकट्ठे किये मैंने,
इसीलिए
आज भी पुराने चल रहे है

नया नया‬ है ‪तू बेटे मैंने ‪खेल‬ पुराने ‪खेले‬ है,
जिन लोगों के दम पर ‪‎उछलता‬ है तू, ‪
मेरे‬ पुराने वो चेले‬ है

मेरी हिम्मत को परखने की गुस्ताखी न हो,
पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका हु

छोटी सोच शंकाओं को जनम देती है
जबकि बड़ी सोच समाधान को


मेरे दुश्मन भी मेरे मुरीद हैं शायद,
वक़्त-बेवक्त मेरा नाम लिया करते हैं,
मेरी गली से गुजरते हैं छुपा के खंजर,
रुबरू होने पर सलाम किया करते हैं।

चुप थे तो जिंदगी चल रही थी लाजवाब,
खामोशियां बोलने लगी तो बवाल हो गया |

जिसने रिस्क से इश्क कर लिया ना कसम से
इतिहास नहीं भूगोल बदल देगा…|

माचिस तो यूँ ही बदनाम है हुजुर,
हमारे तेवर तो आज भी आग लगाते है।

प्यार, इश्क, मोहब्बत सब धोखेबाजी है,
अपनी लाइफ में तो सिर्फ Attitude ही काफी है..!

हालात के कदमों पर समंदर नहीं झुकते,
टूटे हुए तारे कभी ज़मीन पर नहीं गिरते,
बड़े शौक से गिरती हैं लहरें समंदर में,
पर समंदर कभी लहरों में नहीं गिरते।

कल ही तो तौबा की मैंने शराब से,
कम्बख्त मौसम आज फिर बेईमान हो गया

अजीब सिल सिला था वो दोस्ती का,
जो कुछ दूर चला और इश्क में बदल गया।

इश्क़ सभी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है,
इश्क़ नहीं किया तो करके देखो,
ज़ालिम हर दर्द सहना सीखा देता है!

दिल में छुपा रखी है मोहब्बत,
काले धन की तरह खुलासा नहीं करता हूँ,
कि कहीं हंगामा ना हो जाये

मुझे तेरा साथ…ज़िन्दगी भर नहीं चाहिए,
बल्कि जब तक तू साथ है…तब तक ज़िन्दगी चाहिए



खुशबू की तरह मेरी साँसों में रहना;
लहू बनके मेरी नस-नस में बहना;
दोस्ती होती है रिश्तों का अनमोल गहना;
इसलिए दोस्त को कभी अलविदा न कहना।

आसमान से तोड़ कर सितारा दिया है,
आलम-ए-तन्हाई में एक शरारा दिया है,
मेरी किस्मत भी नाज़ करती है मुझपे,
खुदा ने दोस्त ही इतना प्यारा दिया है।

ये दोस्त कभी मुझे भुला न देना,
इस हँसते हुए चेहरे को कभी रुला न देना,
कभी किसी बात पर खफा हो भी जाओ,
पर मुझसे दूर होकर मुझे जुदाई की सजा न देना

किस हद तक जाना है ये कौन जनता है,
किस मंजिल को पाना है ये कौन जनता है.
दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो
किस दिन बिछड जाना है ये कौन जनता है

कहीं अंधेरा तो कहीं शाम होगी,
मेरी हर ख़ुशी तेरे नाम होगी,
कभी मांग कर तो देख हमसे ए दोस्त,
होंठो पर हसीं और हथेली पर जान होगी।

दोस्ती कोई खोज नहीं होती,
हर किसी से ये हर रोज़ नहीं होती,
अपनी ज़िन्दगी में हमें बेवजह मत समझना,
क्योंकि पलकें आँखों पे कभी बोझ नहीं होती

तारों में अकेले चांद जगमगाता है।
मुश्किलों में अकेले इंसान डगमगाता है।
काटों से मत घबराना मेरे दोस्त।
क्योंकि काटों में भी गुलाब मुस्कुराता है।

प्यार करने वालों की किस्मत खराब होती है,
हर वक़्त इन्तहा की घड़ी साथ होती है,
वक़्त मिले तो हर रिश्तो का किताब खोल के देख लेना भाई,
दोस्ती हर रिश्ते से लाजवाब होती है.

शर्त लगी थी ख़ुशी को एक अलफ़ाज़ में लिखने की,
लोग किताबें ढूंढ़ते रह गए हम ने दोस्त लिख दिए |

लोग कहते हैं कि इतनी दोस्ती मत करो
कि दोस्ती दिल पर सवार हो जाए,
हम कहते हैं कि दोस्ती इतनी करो
कि दुश्मन को भी तुमसे प्यार हो जाए



आज कल वो हमसे डिजिटल नफरत करते हैं,
हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं..

तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा,
हम चाहते ही क्या थे तुमसे तुम्हारे सिवा

मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हैं मौसम की तरह लोग… बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं।

हम तो फूलों की तरह,
अपनी आदत से बेबस हैं…!
तोडने वाले को भी,
खुशबू की सजा देते हैं..!!

तेरी यादो का हिसाब हर रोज कर लेता हूँ,
थोडा हँस लेता हूँ
थोडा रो लेता हूँ

काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो हमें यूँ रुसवा न किया जाता,
यह बेरुखी भी उनकी मंज़ूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ तो लिया होता।

मुफ्त में नही सीखा उदासी में मुस्कुराने का हुनर,
बदले में ज़िन्दगी की हर खुशी तबाह की है हमने

हकीकत जान लो जुदा होने से पहले,
मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले,
ये सोच लेना भुलाने से पहले
बहुत रोई हैं आँखें मुस्कुराने से पहले

हमारे अपने हमे कभी नही रुलाते,
बल्कि रुलाते तो वो हैं
जिन्हें हम अपना समझने की
गलती कर लेते हैं

अभी जरा वक़्त हैं,
उसको मुझे अजमाने दो,
वो रो-रोकर पुकारेगी मुझे,
बस मेरा वक़्त तो आने दो

नासमज ही रहते तो अच्छा था,
उलझने बढ़ गयी हैं, जब से समजदार हुए हैं




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